Kallaji Rathore Temple – Chittorgarh

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Kallaji Rathore

Kallaji Rathore History In Hindi 

Kallaji RathoreKallaji Rathore was the eldest son of Rawal Meghraj of Mehwa near Jasol, Kallaji or Kalla died fighting in the Third Saka (vikram Samvat 1624 in chittaurgarh against forces of Akbar defending Mewar). Descendants of Kallaji were later granted jagir by Mewar.

They finally settled in Neemri and ruled the thikana comprising 60 villages until India’s independence in 1947 and merger of Mewar in the Union of India.

राजस्थान की पुण्य धरा पर अनेको वीर हुए है । उन्ही में से एक प्रसिद्ध लोकदेवता वीरवर कमधज कल्ला राठौड़ हुए। जिनकी वीरता से न केवल मेवाड़ अपितु समस्त भारत गौरवान्वित हुआ है ।

कल्ला जी राठौड(Kallaji Rathore) जन्म विवरण  :-

Kallaji Rathore कल्ला जी का जन्म विक्रम सवन्त 1601 में मेड़ता प्रान्त (Ajmer ) में हुआ था । उनके पिता का नाम राव अचलसिंह जी था । उनकी माता का नाम श्वैत कुंवर था । इन्ही के काल में हुए कृष्ण भक़्त मीरा बाई कल्ला जी की भुआ थी ।

Kallaji Rathore
Meera Temple -Chittorgarh

बचपन से ही कल्ला जी देशप्रेमी थे । वे बड़े ही वीर -योद्धा और रणबांकुरे थे । उनकी वीरता का परचा दूर -दूर तक था । वे अनेक विधाओं में निपुण हुए । कल्ला जी राठौड ने तीर ,भाला ,खड्ग ,तलवार ,अस्त्र -शस्त्र आदि शिक्षा ली। वे क्षत्रिय धर्म में भी पारंगत हुए । उनके काल में अकबर द्वारा थोपी गई कुप्रथाओ के पुरजोर विरोधी थे । इसी विरोध के चलते उन्होंने मारवाड़ छोड़ दिया । तथा मेवाड़ जाने का फैसला किया ।

उनके इस तरह अचानक घर छोड़ने की सुनकर उनके भाई तेज सिंह, मित्र रणधीर सिंह और विजय सिंह को चला तो वे तुरंत उनके पीछे – पीछे चल दिए । कल्ला जी अपने मित्रो के साथ मेवाड़ की रण भूमि चित्तौडगढ़ पहुंचते है । वह चित्तौड के राव उदय सिंह और काका जयमल जी ने उनका शानदार स्वागत किया । कल्ला राठोड़ की वीरता, शैार्य और पराक्रम को देखकर उदय सिंह अत्यंत प्रस्सन हुए । और उन्हें रनेला का जागीदार घोषित कर दिया ।

कल्ला जी ने अपने मित्रो के साथ अपनी नयी राजधानी रनेला के लिए प्रस्थान किया । उस समय तेज वर्षा के कारण वागड़ में वहां के राव कृष्णदेव की पुत्री कृष्णकांता के आग्रह पर रात्रि विश्राम किया । यही उनका राजकुमारी से प्रथम मिलन था । रनेला में वहां के लोगो ने अपने नए राजा का ढोल-नगाड़ो से स्वागत किया ।

कल्ला जी अपने नए राज्य की जनता का प्रतिदिन दुःख सुनते तथा उनका उचित निवारण करते थे। उन्होंने राज्य में अर्थव्यवस्था ,अनुशासन व न्याय उचित तालमेल बनाया । उस समय रनेला के पास दस्युओं का आतंक था । जिनका ठाकुर गमेती पेमला था । कल्ला जी ने भोराई-गढ़ को दस्युओं के आतंक से मुक्त किया ।

कल्ला जी जब तोरण पर थे तभी उन्हें जयमल का सन्देश मिलता है, की अकबर ने चित्तौडगढ़ पर आक्रमण कर दिया । तुम शीघ्र आ जाओ । वे पवन के वेग से निकल जाते है । और कृष्णकांता को वचन देते है की वे शीघ्र वापस आएगे । उन्हें देखकर जयमल अत्यंत प्रस्सन हुए । युद्ध प्रारंभ हुआ । तथा वे बड़ी वीरता से दुश्मनो को पछाड़ रहे थे । चित्तौडभूमि पर लाशे बिछ गयी । अकबर की सैना हार रही थी । तभी अकबर ने मौका देखकर जयमल की जांघ पर गोली मार दी । जयमल की हालत देखकर कल्ला जी परेशान हो गए । उन्होंने जयमल को अपने कंधो पर बिठा लिया । और फिर दोनों लड़ने लगे । उनका वह चतुर्भुज रूप देखकर अकबर की सैना घबरा गयी।

अंत में कल्ला जी का सिर कट गया । फिर भी वे लड़ते रहे । तथा विजयी हुए । वे अपना वचन निभाने के लिए कृष्णकांता से मिलने गए । उनके मिलान के बाद उन्होंने अपने प्राण त्याग दिए । कृष्णकांता भी उनके साथ सती हो गई ।

कल्ला थारे नाम री कोटड़ी, महला सू हे मोटी ॥

प्रात :काल जो सुमिरन करे, मले रजक ने रोटी ॥

“बारम्बार प्रणाम है “

मेड़ता के राजपुताना आससिह के पुत को

 माँ श्वेतकुँवर के लाल और मेवाड़ की शान को

नागनेचा के भक्त को और गुरु भैरव के दास को
रानी कृष्णकांता के हिवड़े की डोर, इस पुण्य धरा के वीर को

और ऎसे कल्ला राठौड़ को मेरा बारम्बार प्रणाम है ।
कमधज के रूप को और शेषावतार की शक्ति को

केसरीया बाना और खड्ग, शस्त्र, भाल को
चित्तौड की रण भूमि को और “मेड़ता” की मातृ भूमि को

उस वीरवर कमधज कल्ला राठौड़ की जननी को
और ऎसे कल्ला राठौड़ को मेरा लाख- लाख प्रणाम है ।

शीश गवां कर भी वचन निभाया उस रणबाँकुरे को
दया, वीरता और साहस के शक्ति पीठ को

दुःखियों के दुःख हर्ता और संतो के रक्षक को
अधर्म के नाशक और धर्म के संरक्षक को

और ऎसे कल्ला राठौड़ को मेरा कोटी -कोटी प्रणाम है ।
और ऎसे कल्ला राठौड़ को मेरा बारम्बार प्रणाम है । 

  Written By: Divya Prajapat

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  1. Comment: jai bhawani jai rajputana veer kallaji rathor ko mera ravi kumar chouhan ka aapko aapke sri charano mein barambar parnaam aapki sada jai ho mera parnaam sawikar kare. Jai mata di.

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