Mukundra Hills National Park In Hindi

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Mukundra Hills National Park In Hindi

ऐसा है टाइगर रिजर्व मुकुन्दरा हिल्स को 9 अप्रेल 2013 को टाइगर रिजर्व घोषित किया गया। यह करीब 760 वर्ग किमी में चार जिलों कोटा, बूंदी, झालावाड़ व चित्तौडगढ़़ में फैला है। करीब 417 वर्ग किमी कोर और 342 वर्ग किमी बफर जोन है। इसमें मुकुन्दरा राष्ट्रीय उद्यान, दरा अभयारण्य, जवाहर सागर व चंबल घडिय़ाल अभयारण्य का कुछ भाग शामिल है। Mukundra Hills National Park In Hindi

देश में बाघों की बसावट व आबादी के लिए एक से बढ़कर एक प्राकृतिक व मुफीद वन्यक्षेत्र हैं, लेकिन फिर भी कई अभयारण्यों में बाघों का कुनबा बढ़ाने व उन्हें सुरक्षित माहौल देने में सरकार व वन विभाग को पसीने आ रहे हैं। इसके उलट मुकुन्दरा हिल्स टाइगर रिजर्व बाघों के लिए किसी जन्नत से कम नहीं। यहां क्या नहीं है… घना जंगल, पहाड़, झरने, पोखर, तालाब और सदानीरा चम्बल और प्रकृति की गोद में पलते सैकड़ों प्रजाति के वन्यजीव। ऐसे में बाघों की बसावट के लिए मुकुन्दरा सुरक्षित, मुफीद और आदर्श जगह है। उल्लेखनीय है कि यहां इसी माह बाघ छोडऩा प्रस्तावित है। इस अनूठे रिजर्व में वन्यजीव, वनस्पति, पुरा सम्पदा पर्यटकों को आकर्षित करती है।

मुकुंद्रा हिल्सः राजस्थान का तीसरा टाइगर रिजर्व

  • 11 अप्रैल, 2013 को राजस्थान सरकार द्वारा राज्य में ‘मुकुन्द्रा हिल्स’ नामक एक नए बाघ अभयारण्य क्षेत्र (रणथम्भौर तथा सरिस्का के बाद राज्य का तीसरा) के गठन की अधिसूचना जारी की गयी।
  • लगभग 759 वर्ग किमी क्षेत्र में विस्तृत इस नए बाघ अभयारण्य को दो भागों, 417 वर्ग किमी. मुख्य बाघ अधिवास (कोर टाइगर हैबीटैट) क्षेत्र तथा 342 वर्ग किमी बफर जोन के रूप में अधिसूचित किया गया है।
  • रणथम्भौर राष्ट्रीय पार्क से जुड़ा मुकुन्द्रा हिल्स क्षेत्र मुख्य रूप से सवाई माधवपुर जिले के हडोटी क्षेत्र में स्थित है परन्तु यह क्षेत्र कोटा, बूंदी, चित्तौड़गढ़ तथा झालावाड़ जिलों तक फैला हुआ है।
  • ध्यातव्य है कि रणथम्भौर टाइगर रिजर्व क्षेत्र में 24 शावकों सहित कुल 50 बाघ हैं जबकि यह क्षेत्र केवल 30 से 40 बाघों के लिए ही पर्याप्त है, ऐसे में मुकुन्द्रा हिल्स बाघ अभयारण्य क्षेत्र, जहां अभी तक एक भी बाघ नहीं है, रणथम्भौर क्षेत्र में बाघों के दबाव को कम करने में सहायक होगा।
  • उल्लेखनीय है कि केन्द्र सरकार ने गत वर्ष मार्च, 2013 में देश में पांच नए बाघ अभयारण्य क्षेत्रों- पीलीभीत (उ.प्र.), रातापानी (म.प्र.), सुनाबेड़ा (ओडिशा), मुकुन्द्रा हिल्स (राजस्थान) तथा सत्यमंगलम (तमिलनाडु) को सैद्धांतिक स्वीकृति प्रदान की थी।
  • उल्लेखनीय है कि तमिलनाडु सरकार द्वारा इसके पूर्व 20 मार्च, 2013 को सत्यमंगलम टाइगर रिजर्व को भी अधिसूचित किया गया था।
  • वर्तमान में प्रोजेक्ट टाइगर के तहत संस्थापित टाइगर रिजर्वों की संख्या 43 है।
मुकुन्दरा हिल्स - Mukundra Hills National Park In Hindi
मुकुन्दरा हिल्स – Mukundra Hills National Park In Hindi

स्थापना – नवंबर 1955 (अभयारण्य के रूप में)| अभयारण्य क्षेत्र का नाम मुकुंदरा की पहाड़ियां जिनका नाम कोटा के प्रसिद्ध प्रकृति प्रेमी हाडा शासक मुकुंद सिंह के नाम पर रखा गया| दर्रा वन्य जीव अभयारण्य जिसका नाम 2003 में दर्रा अभयारण्य से बदलकर राजीव गांधी नेशनल पार्क रखा तथा 2006 में वसुंधरा सरकार ने मुकुंदरा हिल्स पार्क नाम रखकर राष्ट्रीय उद्यान का स्तर प्रदान करने का प्रस्ताव पारित किया परंतु इस प्रस्ताव को केंद्र ने मंजूरी नहीं दी| मुकुंदरा हिल्स को राष्ट्रीय पार्क का दर्जा देने के लिए 9 जनवरी 2012 को अधिसूचना जारी की| [ जवाहर सागर अभयारण्य, चंबल घड़ियाल अभ्यारण्य, दर्रा अभयारण्य के कुछ भाग (लगभग 199.51km² क्षेत्र )को मिलाकर राज्य का तीसरा राष्ट्रीय उद्यान बनाने की घोषणा की| ] 9 अप्रैल 2013 को टाइगर रिजर्व घोषित किया गया|
[राजस्थान का तीसरा टाइगर रिजर्व 1. रणथंबोर 2. सरिस्का 3.मुकुंदरा ]

विस्तार – 
यह राजस्थान के 4 जिलों- कोटा ,बूंदी ,झालावाड़ ,चित्तौड़गढ़ में फैला हुआ है | राष्ट्रीय राजमार्ग 12 पर स्थित|
राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र-*294.41 km²
बाघ परियोजना क्षेत्र – 759.99 km²(कोर एरिया- 417 km², बफर जोन कवरेज एरिया -342.82 km²)

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अभयारण्य के प्रमुख आकर्षण

1. गागरोनी तोता मुकुंदरा हिल्स में पाया जाने वाला विशेष प्रजाति का तोता जो कि इंसान की आवाज की हूबहू नकल कर सकता है| इसकी कंठी लाल रंग की व पंख पर लाल रंग का धब्बा होता है|इसे हीरामन तोता तथा हिंदुओं का आकाश लोचन (मनुष्य की आवाज में बोलने वाला) भी कहा जाता है| प्राचीन काल में इस तोते का उपयोग जासूसी करने हेतु किया जाता था|
2. इसे वन विभाग ने झालावाड़ जिले का शुभंकर घोषित किया है|
3. सर्वाधिक घड़ियाल और सारस पाए जाते हैं|
4. सांभर ,चीतल, नीलगाय, हरिन, जंगली सूअर, लोमड़ी, खरगोश आदि जानवर इस अभयारण्य में पाए जाते हैं|
5. यह अभयारण्य धोकड़ा ( एनोजिस पन्डूला )वनों के लिए  प्रसिद्ध है|

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